धनतेरस पर बर्तन से पहले यहां होती है आरोग्य की पूजा: इंदौर के आड़ा बाजार का होलकरकालीन धन्वंतरि मंदिर
धनतेरस पर इंदौर के आड़ा बाजार स्थित प्राचीन भगवान धन्वंतरि मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं और वैद्यों की भीड़ रही। मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक प्रतिमा होलकर रियासत के राजवैद्य पंडित लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी ने स्थापित कराई थी और इसे करीब 200 साल पुराना बताया जाता है।

धनतेरस पर ज्यादातर घरों में सोना, चांदी और बर्तन खरीदे जाते हैं। लेकिन इंदौर के आड़ा बाजार में एक मंदिर ऐसा है, जहां इस दिन सुबह से रात तक कतार धन के लिए नहीं, सेहत के लिए लगती है।
यहां भगवान धन्वंतरि विराजमान हैं — आयुर्वेद और चिकित्सा के देवता। इस मंदिर की कहानी होलकर दरबार से जुड़ी है। कैसे?
विज्ञापनआपका बिज़नेस, पूरे इंदौर की नज़र मेंसूर्योदय न्यूज़ पर विज्ञापन दें — वेबसाइट, YouTube, Instagram और Facebook पर।रेट जानें →होलकर दरबार के राजवैद्य ने कराई स्थापना
मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, यहां की प्रतिमा होलकर रियासत के राजवैद्य पंडित लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी ने स्थापित कराई थी। प्रतिमा को करीब 200 साल पुराना बताया जाता है।
पुजारी बताते हैं कि यह प्रतिमा विशेष रूप से जयपुर से मंगवाई गई थी।
पुजारी ने सुनाई स्थापना की कहानी
पुजारी के अनुसार, उस दौर में शहर पर आए एक संकट में हजारों लोगों की जान गई थी। तब होलकर महाराजा ने लक्ष्मीनारायण जी से यहां भगवान धन्वंतरि की स्थापना करने, चिकित्सकों का सम्मेलन बुलाने और आयुर्वेद के विद्वानों से दवाइयां बंटवाने को कहा था।
मान्यता है कि वही परंपरा आज तक चली आ रही है। पुजारी बताते हैं कि होलकर महाराजा खुद यहां दर्शन के लिए आते थे।
नीचे राधा-कृष्ण, ऊपर धन्वंतरि
इस मंदिर की खासियत यह भी है कि एक ही जगह दो मंदिर हैं। नीचे राधा-कृष्ण का मंदिर है और ऊपर भगवान धन्वंतरि विराजमान हैं।
भगवान के पास औषधियां रखी जाती हैं। शहर के वैद्य यहां जड़ी-बूटियां चढ़ाते हैं और प्रसाद के रूप में उन्हें वापस ले जाते हैं। धनतेरस पर भगवान का अभिषेक पंचामृत के साथ औषधियों और जड़ी-बूटियों से भी किया जाता है।
लक्ष्मी पूजा से पहले धन्वंतरि क्यों?
पुजारी कहते हैं कि बहुत से लोग धनतेरस को सिर्फ बर्तन और गहनों की पूजा का दिन मानते हैं। उनके अनुसार शास्त्रों में लक्ष्मी पूजा से पहले भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है, क्योंकि धन-संपत्ति का सुख तभी है जब सेहत अच्छी हो। मान्यता है कि समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
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दर्शन का समय और ऑनलाइन अभिषेक
पुजारी के मुताबिक, धनतेरस की रात करीब 12–1 बजे तक दर्शन के लिए श्रद्धालु और वैद्य आते रहेंगे। जो लोग मंदिर नहीं पहुंच पाते, उनके लिए ऑनलाइन अभिषेक की व्यवस्था भी की गई है।
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय से बीमार कई लोग यहां मन्नत लेकर आते हैं।
आगे क्या
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