पहले भी हुई थी मौत, फिर खुला क्लिनिक: इंदौर में 10 साल की बच्ची ने तोड़ा दम
इंदौर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र के एक अवैध क्लिनिक में इलाज के दौरान 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में पुलिस ने क्लिनिक संचालक और इलाज करने वाले डॉक्टर पर गैर इरादतन हत्या की धारा में केस दर्ज किया है। इसी क्लिनिक में पहले एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे बंद कराया था।

इलाज के लिए एक परिवार अपनी 10 साल की बेटी को मोहल्ले के क्लिनिक ले गया। कुछ ही देर में बच्ची की तबीयत बिगड़ी, उसे बड़े अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अब सामने आया है कि जिस क्लिनिक में यह इलाज हुआ, उसे पहले ही बंद कराया जा चुका था। फिर वह दोबारा कैसे खुल गया?
विज्ञापनआपका बिज़नेस, पूरे इंदौर की नज़र मेंसूर्योदय न्यूज़ पर विज्ञापन दें — वेबसाइट, YouTube, Instagram और Facebook पर।रेट जानें →पहले भी हो चुकी थी एक मौत
मामला इंदौर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, इसी क्लिनिक में पहले भी एक महिला की मौत हो चुकी थी।
उस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने क्लिनिक बंद करवा दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद क्लिनिक को दोबारा चालू कर दिया गया और वहां मरीजों का इलाज होता रहा।
उस दिन क्या हुआ
पुलिस के मुताबिक, इलाज के दौरान बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया।
एमवाय अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। एक परिवार ने अपनी बेटी खो दी, और सवाल उस क्लिनिक पर उठे जहां उसका इलाज हुआ था।
शहर में इलाज में लापरवाही के आरोप का यह इस हफ्ते का अकेला मामला नहीं है। इससे पहले जुपिटर अस्पताल में मरीज की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया था।
जांच समिति को क्या मिला
घटना की सूचना मिलने पर थाने ने सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) को पत्र लिखा। इसके बाद एक जांच समिति बनाई गई।
पुलिस के मुताबिक, समिति की जांच में क्लिनिक के संचालन और इलाज की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां मिलीं। जांच में बताया गया कि जो इलाज अपनाया गया, वह पूरी तरह गलत था।
समिति ने क्लिनिक से जुड़े लोगों की डिग्री की भी जांच की। पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस तरह इलाज करने के लिए अयोग्य पाया गया।
किन धाराओं में केस
पुलिस ने क्लिनिक संचालक और इलाज करने वाले डॉक्टर, दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) और मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 24 समेत संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।
ध्यान रहे, दोनों अभी आरोपी हैं। आरोप अदालत में साबित होने बाकी हैं।
आगे क्या
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम बनाई गई है। जांच में जो और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक बार बंद कराया गया क्लिनिक दोबारा कैसे चलता रहा। किसी भी क्लिनिक में इलाज से पहले डॉक्टर की डिग्री और पंजीयन ज़रूर देख लें।
शहर की दूसरी बड़ी खबर — इंदौर में 2 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप में तीन लोगों पर केस। ऐसी ही खबरों के लिए सूर्योदय न्यूज़ से जुड़े रहें।
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