इंदौर में 14 इंच कम बारिश, यशवंत सागर अधूरा: दिसंबर से ही पानी की किल्लत का डर
इंदौर में इस मानसून में करीब 23 इंच बारिश हुई, जो सामान्य से लगभग 14 इंच कम है। यशवंत सागर और बिलावली तालाब पूरे नहीं भरे, इसलिए नगर निगम दोनों तालाबों को नर्मदा के पानी से भरने, नए बोरिंग पर रोक और 800 से ज़्यादा टैंकर चलाने की तैयारी कर रहा है।

बारिश का मौसम बीत चुका है, लेकिन इंदौर के तालाब अब भी अधूरे हैं। इस बार शहर में सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी गिरा है।
इसका असर गर्मियों से पहले ही दिख सकता है। आशंका है कि कुछ इलाकों में दिसंबर-जनवरी से ही पानी की किल्लत शुरू हो जाए। तो शहर को प्यासा रहने से बचाने का प्लान क्या है?
विज्ञापनआपका बिज़नेस, पूरे इंदौर की नज़र मेंसूर्योदय न्यूज़ पर विज्ञापन दें — वेबसाइट, YouTube, Instagram और Facebook पर।रेट जानें →कितनी कम हुई बारिश
इस मानसून सीजन में इंदौर में करीब 23 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 14 इंच कम बताई जा रही है।
16 अक्टूबर को जल संकट पर हुई बैठक में भी यही चिंता सामने आई कि इस बार बारिश औसत से करीब 40 प्रतिशत कम रही है, इसलिए अभी से तैयारी ज़रूरी है।
यशवंत सागर और बिलावली क्यों अहम
कम बारिश का सीधा असर शहर के बड़े जलस्रोतों पर पड़ा है। यशवंत सागर और बिलावली तालाब इस बार अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए।
यशवंत सागर की क्षमता करीब 19 फीट है। यहीं से शहर की 6 पानी की टंकियों को सप्लाई मिलती है। तालाब पूरा न भरने से इन टंकियों से जुड़े इलाकों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ सकता है।
बोरवेल को लेकर चिंता पहले भी जताई गई थी — पढ़ें इंदौर में जनवरी तक सूख सकते हैं बोरवेल?
नर्मदा के पानी से भरेंगे तालाब
नगर निगम ने यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा के पानी से दो बार भरने की योजना बनाई है। इसके लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से बात की गई है और सैद्धांतिक सहमति मिलने की बात कही गई है।
कोशिश है कि नवंबर से अप्रैल के बीच दोनों तालाबों में पर्याप्त पानी रहे। बिलावली तक पानी पहुंचाने वाली लाइन पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है, जबकि यशवंत सागर का एस्टीमेट अभी बनना है। जल संकट से निपटने के लिए 50 करोड़ रुपये की मांग भी रखी गई है।
बोरिंग पर रोक, 800 से ज़्यादा टैंकर
शहर में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। इसे देखते हुए नए बोरिंग पर रोक लगाने की तैयारी है और इसका प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। निगम का कहना है कि सड़क और दूसरे निर्माण कामों में भी बड़े पैमाने पर बोरिंग हो रहे हैं।
पिछले साल शहर में 700 से ज़्यादा टैंकर चलाए गए थे। इस बार 800 से ज़्यादा टैंकर चलाने की तैयारी है। जिन इलाकों तक पाइपलाइन नहीं पहुंची, उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
बैठक में बताया गया कि शहर का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है जहां अब तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंचा। वहां टैंकर या बोरिंग ही सहारा हैं। खराब बोरिंग तुरंत सुधारने और ज़रूरत पड़ने पर बोरिंग में पाइप बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
आगे क्या
नगर निगम अब जल सप्लाई की हर हफ्ते समीक्षा करेगा। पाइपलाइन के लीकेज जल्दी ठीक करने, पानी की बर्बादी पर कार्रवाई करने और निर्माण कामों में ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल बढ़ाने पर ज़ोर रहेगा।
तालाबों में नर्मदा का पानी कब से पहुंचेगा, यह आने वाले हफ्तों में तय होगा। तब तक पानी बचाना हर घर की ज़िम्मेदारी है।
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