पार्टी का खर्च नहीं दिया तो ड्यूटी से हटाया? इंदौर के डायल 112 पायलटों का आरोप
इंदौर में पुलिस जनसुनवाई के दौरान डायल 112 के दो पायलटों ने जिला सुपरवाइज़रों पर शराब और मटन पार्टी का खर्च उठाने के लिए दबाव बनाने और इनकार पर ड्यूटी से हटाने का आरोप लगाया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दोनों पक्षों को सुनकर जांच की जा रही है।

जो डायल 112 मुसीबत में लोगों की मदद के लिए दौड़ती है, उसी के दो पायलट इस बार खुद शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। मंगलवार को इंदौर की पुलिस जनसुनवाई में उन्होंने अपने ही सुपरवाइज़रों पर गंभीर आरोप लगाए।
आरोप एक पार्टी के खर्च से जुड़ा है। आखिर उस रात क्या हुआ, और अब जांच किस दिशा में है?
विज्ञापनआपका बिज़नेस, पूरे इंदौर की नज़र मेंसूर्योदय न्यूज़ पर विज्ञापन दें — वेबसाइट, YouTube, Instagram और Facebook पर।रेट जानें →अनंत चतुर्दशी की रात क्या हुआ
पायलटों के मुताबिक, मामला 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी की रात का है। उनका आरोप है कि धार रोड स्थित एक ढाबे पर जिला सुपरवाइज़रों ने उन पर शराब की दो बोतलों और मटन पार्टी का खर्च उठाने का दबाव बनाया।
पायलटों का कहना है कि उन्होंने यह मांग मानने से इनकार कर दिया।
इनकार के बाद ड्यूटी से हटाने का आरोप
आरोप है कि इनकार करने के बाद उन्हें ड्यूटी से हटा दिया गया।
पायलटों ने और भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तय 8 घंटे की जगह उनसे 16 घंटे तक ड्यूटी कराई जाती थी। उन्होंने वॉट्सऐप कॉल के ज़रिए पांच-पांच हज़ार रुपये मांगे जाने का आरोप भी लगाया है।
इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी होना बाकी है।
उसी जनसुनवाई में 38 लाख की ठगी की शिकायत भी
इसी जनसुनवाई में 100 से ज़्यादा शिकायतकर्ता अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इनमें लोन दिलाने के नाम पर करीब 38 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत भी शामिल थी।
फरियादियों का आरोप है कि लोन दिलाने के नाम पर उनसे पैसे लिए गए, और लोन की राशि मिलने के बाद भी रकम हड़प ली गई। उनका कहना है कि शिकायत पहले ही दर्ज हो चुकी है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई। पूरी खबर यहां देखें: लोन दिलाने के नाम पर 38 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, पीड़ितों ने की गिरफ्तारी की मांग।
पुलिस अधिकारियों का क्या कहना है
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, डायल 112 के पायलटों और मॉनिटरिंग एजेंसी के बीच प्रशासनिक विवाद और अनुशासनहीनता से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं।
अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनकर जांच की जा रही है। यानी यह मामला सिर्फ एक तरफ के आरोपों का नहीं है, दूसरी तरफ से भी शिकायतें हैं।
आगे क्या
जांच में यह साफ होना है कि पार्टी के खर्च, ड्यूटी के घंटों और पैसों की मांग वाले आरोप कितने सही हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही ज़िम्मेदारी तय होगी और आगे की कार्रवाई होगी।
पुलिस से जुड़ी एक और बड़ी खबर — इंदौर में प्रधान आरक्षक के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा। इस मामले की अपडेट के लिए सूर्योदय न्यूज़ से जुड़े रहें।
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